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"योग मन की समाप्ति है।" -महर्षि पतंजलि लेबलसह पोस्ट दाखवत आहे

हलासन

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हलासन:- इस आसन को करते समय शरीर का आकार हल के समान होता है इसलिये इसे हलासन कहते है। स्थिती:- पीठ के बल लेटे हूये आसन की स्तिथी। कृति:- 1) हथेलिया कमर की ओर रखकर दोनों हाथों को दोनों तरफ से लंबा करे, दोनों पैर 45° अंश तक उठाएं । 2) पुठ्ठे उठाते हुए पैर खडे़ करे अर्थात पैरों को 90° अंश तक लाएं। 3) पुठ्ठे उठाकर पैर सिर की ओर जमीन से एक हाथ ऊंचाई पर ले जाएं। 4) पैर सिर की तरफ जमीन तक ले जाएं। (घुटने व पैर सीधे रहें परंतु जमीन कों टिकाएं नहीं) ।। पूर्ण स्थिती ।। 5) पैर जमीन से 15° अंश तक उठायें।                              6) कमर जमीन पर रखकर पैर खडे़ करें। पैर आधे पर नीचे लाएं अर्थात पैर 90° अंश तक लाएं।।                    7) पैर 45°अंश पर लाएं।।                                            8) पैर सीधे करें।  ।। पूर्व स्थिती ।।     ...