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स्थिरसुखमासनम् | लेबलसह पोस्ट दाखवत आहे

नौकासन

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 स्तिथि :- दोनों  हाथोंकॊ  जंगआओ पर रखकर सीधे पीठ के बल लेट जाए क्रिया :- स्वास लेते हुए हाथ और सर उठाए अब पैर भी उठाए हाथ, पैर, और सर समांतर रखे ताकि पूरा शरीर नौका जैसा दिखे. ईस स्तिथि मे कुछ देर रूककर धीरे से हाथ पैर और सर स्वास बाहर छोड़कर नीचे टिकाये ऐसा 3-6 बार कर सकते है | इस आसन का संलग्न आसन धनुरासन है इस लिए यह आसन करने के बाद धनुरासन करना आवश्यक है | लाभ :- इस आसन के लाभ उत्तानपादसन जैसे ही है | हृदय और फे फेफड़े भी प्राणवायु के प्रवेश से सशक्त बनते है | आत, आमाशय, अग्नाशय, और यकृत इनके लिये यह आसन उत्तम है |